एमसीबी–कोरिया में नियम ताक पर, चहेते कर्मचारियों को मिल रहा संरक्षण संलग्नीकरण पर रोक के बावजूद मनमानी?

 

एमसीबी/कोरिया। एक ओर जहां शासन स्तर से कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पर पूर्णतः रोक लगाई गई है, वहीं दूसरी ओर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) और कोरिया जिले में यह प्रक्रिया धड़ल्ले से जारी है। इससे शासन के “सुशासन” के दावों पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।


जानकारी के अनुसार, नियमों को दरकिनार करते हुए कुछ चहेते कर्मचारियों का संलग्नीकरण सीधे राज्य स्तर के कार्यालयों से किया गया है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित कार्यालय में कर्मचारी की वास्तविक आवश्यकता है या नहीं, कार्यभार है या नहीं इन बातों पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। इतना ही नहीं, कई मामलों में नजदीकी जिलों को नजरअंदाज कर दूरस्थ जिलों से कर्मचारियों को संलग्न किया जा रहा है, जो पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और औचित्य पर सवाल खड़े करता है!



क्या यह पूरा खेल कही प्रभाव और ऊंची पहुंच के दम पर तो नहीं, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इन कर्मचारियों पर किसका वरदहस्त है, जिसके चलते उच्च प्रशासनिक अधिकारी भी कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस तरह की मनमानी न केवल नियमों की अवहेलना है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता को भी प्रभावित करती है। वही जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पूरे मामले को और संदिग्ध बना रही है। यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो संलग्नीकरण का यह खेल आगे भी जारी रहने की आशंका है।

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